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जनमाष्टमी पर विशेष

Posted On: 25 Aug, 2016 कविता,Special Days,Religious में

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ओ रे कान्हा
सुन तूने जग को सच्चे प्रेम का पाठ पढ़ाया
मधुर वंसी की तान पर
बड़ों बड़ों को नचाया
द्रोपती को चीरहरण से बचाया
असुरो को मार गिराया |

ओ रे कान्हा आ जा
आज एक बार फिर
चमत्कार दिखाने को |

कालिया जैसे नागों ने
हर ओर फन अपने फैला रखे है
हर मोड़ पर घात लगाए बैठे दुशाशन
चीरहरण को
हर घर में हो गया कंस
रुलाने माँ बाप बहन को |

फैला अँधेरा चहुँ ओर
दुःख दर्द का
लो फिर से कोई अवतार
मिटाने यह अन्धकार
तेरे भगत कर रहे
बेसब्री से तेरे इंतज़ार
नाअब ओर रुला
ना अब ओर तड़पा
जल्दी से आ
जल्दी से आ …..
तेरे इंतज़ार में …..
ऋतू गुप्ता

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