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सब मनाये वैलेंटाइन डे

Posted On: 14 Feb, 2016 कविता में

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आज सवेरे सवेरे
बेटे ने मेरे
बोला दूध वाले से
कामवाली बाई से
हैप्पी वैलेंटाइन डे |
सोचती मै
सच्च में
बच्चे मन के सच्चे
भेदभावः न जाने|
त्योहारों के मायने
बना रखे है सब
हमने अपने मन से|
त्यौहार और डे
कैसे है मनाने
हमसे बढ़ कर
बच्चे है जानते
ना जात पात देखते
न भेदभाव न करते
दिल से सबको मुबारकबाद देते |
आओ हम भी निकल जाये इन् दायरों से
हम भी बोलदे सब को
बिना स्वार्थ
बिना भेदभाव के
शर्म न करे अबकी बार
तोड़ दे ऊँच नीच की दीवार
मिल जुल कर मनाये हर त्यौहार
मिलजुल मकर मनाये हर त्यौहार

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
February 17, 2016

बहुत अच्छी अभिव्यक्ति दी है ऋतु जी आपने । सचमुच बच्चों जैसा ही निर्मल मन होना चाहिए हम सबका ।

    Ritu Gupta के द्वारा
    February 21, 2016

    dhanyabaad jitender ji


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