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शादी बनाम प्याज

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शादी बनाम प्याज
हाल एशादी बयान करती हूँ
सच्च कहती हूँ ना मजाक करती हूँ

एक रईसजादी की थी शादी
भव्य समारोह था, भव्य ही थी सजावट
शानो शौकत की कहीं ना कोई कमी थी
देख सजावट उंगली हमने दांतो तले दबा ली थी

सबसे पहले मिलनी करवाई गयी
फूलों की माला ना इसमें पहनाई गयी
प्याज पिरोई माला ही मेहमानों को थी पहनाई गयी

एक रईसजादी की थी शादी
फिर थी दूल्हे मियां द्वारा रिब्बन काटने की बारी
देख रिब्बन दूल्हे मिया हो गए बागो बाग
निराला यह रिब्बन कैंची से ना काटा गया
मुक्की मारकर ही यह रसम थी निभाई गयी

एक रईसजादी की थी शादी
आगे क्या बताऊ क्या क्या हुआ
दूल्हा स्टेज पर पहुँच गया
जयमाला की थी रसम निभानी
दुल्हन बाकी थी स्टेज पर आनी
दुल्हन आई …..
देख दुल्हन का सिंगार सब रह गए थे हैरान
भरी सा लेहंगा जिस पर
हीरा था चमकता
कहीं कहीं प्याज रूपी
स्टोन भी था दमकता
क्या हार क्या बाजूबंद ,झुमके और कंगन
हर किसी में प्याज रूपी नगीना था फिट किया
गहने भी क्या शोभा बढ़ा रहे थे
खानदान है रईस यही बता रहे थे
दुल्हन के महंगे श्रृंगार की कहानी सुना रहे थे

एक रईसजादी की थी शादी
विदाई का समय था आया
दुल्हन को पिया घर था जाना
पिता जी ने खूब दान दहेज दिया
प्याज,प्याज और प्याज से ही बेटी का घर भर दिया
हर मेहमान को फल और मिठाई से नही
बल्कि प्याज के टोकरे से था विदा किया

एक रईसजादी की थी शादी
हाल ए प्याज रहा यही तो
तेह सोने को भी पछ्छाद दिया
गरीब तोह नाम भी भूल जायेगे
अमीरो का ही प्याज पर राज रहेगा

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 21, 2014

बहुत ही मजेदार व्यंग रचना ,रितु जी प्याज अब रईसों के लिए है ,आम आदमी की पहुँच से बाहर है ,सामयिक हास्य रचना ,हार्दिक बधाई .


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