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बस इतनी सी ख्वाहिश मेरी (महिला दिवस पर विशेष )

Posted On: 7 Mar, 2014 Others,Special Days में

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जीने दो मुझे जीने दो
सर उठा कर जीने दो
सिर्फ महिला दिवस पर ही नही
हर रोज मेरा सम्मान करो

बस इतनी सी ख्वाहिश मेरी
पूरी तुम आज करो

उम्र के हर दौर में
शिकार हो रही भेड़ियों का
इन भेड़ियों को समाज से निकाल
अब बाहर करो

बस इतनी सी ख्वाहिश मेरी
हर रोज मेरा सम्मान करो

जिस राह से मैं गुजरू
उस राह पर बेखोफ चलने का
तुम दो अधिकार मुझे

बस इतनी सी ख्वाहिश मेरी
हर रोज मेरा सम्मान करो

रोज तिल तिल कर मर रही हूँ मैं
यूँ घुट घुट कर जी रही
डर मेरा यह निकाल अब बाहर करो

बस इतनी सी ख्वाहिश मेरी
हर रोज मेरा सम्मान करो

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ADVOCATE VISHAL PANDIT के द्वारा
March 21, 2014

VERY WELL WRITTEN……. KEEP IT UP

Madan Mohan saxena के द्वारा
March 21, 2014

अच्छी कबिता सुन्दर प्रयास ,आपकी ही नहीं हम सबकी ये ख्वाहिश है जो अपनी माँ बहनो को खुशहाल देखना चाहता हैं कभी इधर भी पधारें आभार मदन

    Ritu Gupta के द्वारा
    March 23, 2014

    madan ji aapna waqt dene ke liye or kavita srahne ke liye shukriya

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
March 8, 2014

बहुत सुन्दर व् सटीक .बधाई

    Ritu Gupta के द्वारा
    March 10, 2014

    Dhanyabaad shikha ji

deepakbijnory के द्वारा
March 8, 2014

UMDA LEKHAN आदरणीय RITU JEE

    Ritu Gupta के द्वारा
    March 10, 2014

    Dhanyabad deepak ji


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