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Pachpan ka Pyar - Contest

Posted On: 15 Feb, 2014 Others,कविता,Contest में

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जवानी के वो दिन बीत गये जो कल
साथ तुम्हारा था ,मैं भी पास था
पर ज़िमेदारिओं तले
वक़्त ना हमारा था |

आज हर वक़्त हर लम्हा
तुम्हारे साथ बिताना चाहता हूँ
बीत गये जो ‘खाली पल’
आज अपने प्यार से सींचना चाहता हूँ|

उम्र के इस दौर में
बच्चे अपनी ज़िंदगी में मस्त हो जाते जब
तन्हाई के इन लम्हों में
मेरा हरपल साथ निभाती तुम|

अपनी प्यारी सी बातों से
मेरी तन्हाई के बादलों को
बन कर चमकती धूप
पल में दूर कर जाती तुम|

सादगी से सजी सवंरी तुम
कुछ झुकी , कुछ थकी सी तुम
आज भी सबका ख्याल रखती
बड़ी ही प्यारी सी लगती तुम|

नाती,पोतों को दुलारती पुचकारती
ममता कि मूरत सी बन जाती तुम
कभी कृषण भक्ति में लीन
मीरा सी लगने लग जाती तुम|

दे रही हो मुझे नया जीवन
भर रही हो मेरा खालीपन
कभी प्यार से ,कभी नोंक झोंक से
हँसता बीतता हमारा जीवन |

तेरे हर रूप ने
मेरी बगिया को सजाया है
तेरी सूझ बुझ ने
मेरी बगिया कि महकाया है |

बस एक आखिरी ख्वाहिश मेरी
तेरा मेरा साथ ना टूटे कभी
जग रूठे तो बेशक रूठे
रूठ ना जाना तुम कभी
रूठ ना जाना तुम कभी-

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
February 17, 2014

बहुत सुंदर

    Ritu Gupta के द्वारा
    February 17, 2014

    Dhanyabaad. Madan ji

Ritu Gupta के द्वारा
February 16, 2014

उत्साह बढ़ाने के लिए धन्यबाद कविता जी | इन परुषों को सब समझ आता है पर इज़हार नहीं कर पाते| प्यार करना तो आता है पर हाले दिल बयां नहीं कर पाते |

kavita1980 के द्वारा
February 16, 2014

बहुत सुंदर इजहार -भावनाओं का –मगर पुरुषों को ये बात इतनी देर से क्यों समझ आती है2 –वक्त गुजरने के बाद


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